सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, झुंझुनूं, राजस्थान सरकार
विश्व सांप दिवस विशेष: 16 जुलाई सांप को देखते ही अक्सर हम में से अधिकांश लोग सांप को देखते ही कांप उठते हैं। लेकिन वास्तव में हमें इनसे भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि सांप इंसान के दुश्मन नहीं, बल्कि दोस्त हैं। लेकिन हमारे अवचेतन मन में बैठे डर की वजह से हम सांपों को देखते ही होश खो बैठते हैं और उन पर हमला कर देते हैं। यह भी देखने को मिला है कि साधारणतया सांप इंसान को नहीं काटते हैं, जब तक कि उन पर हमला नहीं हो या उनमें सुरक्षा का भाव नहीं आए। एक सच यह भी है किस सांप भी हमसे उतना ही डरते हैं, जितना हम सांपों से। विश्व भर में सांपों की 3500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से कुछेक ही जहरीली होती हैं। भारत में भी पाए जाने वाले सांपों में से केवल 4 प्रजाति कोबरा करैत, रसेल वाइपर, सॉव स्केल्ड और वाइपर ही जहरीले हैं। लेकिन सांप इंसान के लिए बेहद उपयोगी, जैव चक्र के लिए भी बेहद जरूरी हैं। दरअसल ये सांप खेतों में फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े-मकोड़ों और चूहों को खा जाते हैं। जिससे न केवल खाद्य श्रंखला सुचारू संचालित होती है, बल्कि इंसान को फसल उत्पादन में फायदा होता है। इसी वजह से कई स्थानीय बोलियों में सांप को क्षेत्रापाल भी कहा जाता है। सांपों का महत्व समझाने के उद्देश्य से ही 1967 में अमेरिका के टेक्सस में सर्वप्रथम सांप दिवस मनाया गया था। इसके बाद से प्रतिवर्ष सांप दिवस मनाया जाता रहा है। तो इस सांप दिवस को हम भी शपथ लें कि सांपों को बेवजह परेशान नहीं करेंगे और उन्हें मारने की बजाय किसी विशेषज्ञ से पकड़वाकर जंगल में छुड़वाएंगे। झुंझुनूं जिले में भी सांप को पकड़ने के विशेषज्ञ बी.एल. सैनी है, जिनसे आपके घर में सांप निकलने पर वन विभाग के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।झुंझुनूं, 15 जुलाई। सांप को देखते ही अक्सर हम में से अधिकांश लोग सांप को देखते ही कांप उठते हैं। लेकिन वास्तव में हमें इनसे भयभीत नहीं होना चाहिए, क्योंकि सांप इंसान के दुश्मन नहीं, बल्कि दोस्त हैं। लेकिन हमारे अवचेतन मन में बैठे डर की वजह से हम सांपों को देखते ही होश खो बैठते हैं और उन पर हमला कर देते हैं। यह भी देखने को मिला है कि साधारणतया सांप इंसान को नहीं काटते हैं, जब तक कि उन पर हमला नहीं हो या उनमें सुरक्षा का भाव नहीं आए। एक सच यह भी है किस सांप भी हमसे उतना ही डरते हैं, जितना हम सांपों से।
विश्व भर में सांपों की 3500 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से कुछेक ही जहरीली होती हैं। भारत में भी पाए जाने वाले सांपों में से केवल 4 प्रजाति कोबरा करैत, रसेल वाइपर, सॉव स्केल्ड और वाइपर ही जहरीले हैं। लेकिन सांप इंसान के लिए बेहद उपयोगी, जैव चक्र के लिए भी बेहद जरूरी हैं। दरअसल ये सांप खेतों में फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े-मकोड़ों और चूहों को खा जाते हैं। जिससे न केवल खाद्य श्रंखला सुचारू संचालित होती है, बल्कि इंसान को फसल उत्पादन में फायदा होता है। इसी वजह से कई स्थानीय बोलियों में सांप को क्षेत्रापाल भी कहा जाता है।
सांपों का महत्व समझाने के उद्देश्य से ही 1967 में अमेरिका के टेक्सस में सर्वप्रथम सांप दिवस मनाया गया था। इसके बाद से प्रतिवर्ष सांप दिवस मनाया जाता रहा है। तो इस सांप दिवस को हम भी शपथ लें कि सांपों को बेवजह परेशान नहीं करेंगे और उन्हें मारने की बजाय किसी विशेषज्ञ से पकड़वाकर जंगल में छुड़वाएंगे। झुंझुनूं जिले में भी सांप को पकड़ने के विशेषज्ञ बी.एल. सैनी है, जिनसे आपके घर में सांप निकलने पर वन विभाग के माध्यम से संपर्क किया जा सकता है।

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